पृथ्वी का भौगोलिक स्वरूप स्थिर नहीं है और इसका सीधा असर जीवन के विकास पर पड़ता है।
हाल ही में 'नेचर जियोसाइंस' (Nature Geoscience) में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय (University of Bristol) के शोधकर्ताओं द्वारा एक नया भू-जलवायु अध्ययन प्रकाशित किया गया है।
इस अध्ययन के अनुसार, आज से लगभग 25 करोड़ साल बाद पृथ्वी के सभी महाद्वीप आपस में जुड़कर एक विशाल सुपरकॉन्टिनेंट (Supercontinent) बनाएंगे, जिसे 'पैंजिया अल्टिमा' (Pangea Ultima) नाम दिया गया है।
इस भूगर्भीय एकीकरण के कारण पृथ्वी का औसत तापमान চরম पर पहुंच जाएगा, जिससे इंसानों सहित अधिकांश स्तनधारी जीवों (Mammals) के लिए ग्रह का एक बड़ा हिस्सा जैविक रूप से रहने योग्य नहीं बचे गा।
टेक्टोनिक मॉडलिंग और जलवायु सिमुलेशन: भविष्य का गणित कैसे काम करता है?
इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने भौतिक अवलोकनों के बजाय एक उन्नत सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन (Supercomputer simulation) का उपयोग किया।
वैज्ञानिकों ने भविष्य की टेक्टोनिक प्लेटों (Tectonic plates) की गति के मॉडल को वायुमंडलीय जलवायु मॉडल के साथ एकीकृत किया।
![]() |
| टेक्टोनिक प्लेट्स: धरती की सतह कैसे हिलती और बदलती है? |
इसमें महाद्वीपों के आपस में टकराने से उत्पन्न होने वाली ज्वालामुखीय गतिविधियों और उससे निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के स्तर का आकलन किया गया।
किसी भी सिमुलेशन की सटीकता उसके 'टेस्टिंग पैरामीटर्स' पर निर्भर करती है; इसलिए इस मॉडल में सौर ऊर्जा की बढ़ती तीव्रता (भविष्य में सूर्य वर्तमान की तुलना में 2.5% अधिक चमकीला होगा) को भी गणना में शामिल किया गया।
50°C औसत तापमान: पसीने से शरीर को ठंडा रखने की जैविक सीमा
सिमुलेशन के स्पष्ट आंकड़े बताते हैं कि पैंजिया अल्टिमा के निर्माण के बाद, धरती के मध्य और अंदरूनी भागों में दैनिक तापमान 40°C से 50°C (104°F से 122°F) के बीच बना रहेगा।
जब सभी महाद्वीप एक हो जाएंगे, तो समुद्र से दूर होने के कारण विशाल महाद्वीपीय क्षेत्रों में नमी नहीं पहुंचेगी और बारिश लगभग बंद हो जाएगी (Continental effect)।
इस अत्यधिक गर्मी और नमी की कमी के कारण पसीने के माध्यम से शरीर को ठंडा रखने की स्तनधारियों की जैविक प्रणाली काम करना बंद कर देगी।
अध्ययन के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप पूरी पृथ्वी का केवल 8% से 16% हिस्सा ही स्तनधारियों के भौतिक अस्तित्व के लिए अनुकूल बचेगा।
'नेचर जियोसाइंस' में सहकर्मी-समीक्षित अध्ययन और संस्थागत पारदर्शिता
यह सिमुलेशन डेटा एक अप्रमाणित प्रीप्रिंट नहीं है, बल्कि एक प्रतिष्ठित सहकर्मी-समीक्षित (Peer-reviewed) वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
इस शोध का नेतृत्व ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अलेक्जेंडर फार्न्सवर्थ ने किया है।
अध्ययन को 'यूके रिसर्च एंड इनोवेशन' (UKRI) और अन्य संस्थागत अकादमिक अनुदानों द्वारा वित्तपोषित किया गया है।
मॉडल की कार्यप्रणाली को जलवायु विज्ञान और भूविज्ञान के स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा जांचा गया है ताकि टेक्टोनिक गणनाओं में किसी भी सांख्यिकीय त्रुटि से बचा जा सके।
सिमुलेशन की सीमाएं: क्या करोड़ों साल की भविष्यवाणी पूरी तरह सटीक हो सकती है?
किसी भी कंप्यूटर सिमुलेशन की अपनी अंतर्निहित वैज्ञानिक सीमाएं होती हैं।
यह अध्ययन पूरी तरह से प्राकृतिक कार्बन चक्र और प्राकृतिक भूगर्भीय गतिविधियों की गतिशीलता पर आधारित है।
इसमें इस बात की गणना नहीं की गई है कि आने वाले 25 करोड़ वर्षों में मानवीय तकनीक (Technology) या कृत्रिम रूप से जलवायु को नियंत्रित करने की क्षमता कैसे विकसित हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, करोड़ों साल भविष्य के ज्वालामुखीय CO2 उत्सर्जन स्तर का सटीक और निर्विवाद अनुमान लगाना सांख्यिकीय रूप से एक जटिल प्रक्रिया है।
पैंजिया से पैंजिया अल्टिमा तक: पृथ्वी का निरंतर विल्सन चक्र
भूविज्ञान के दृष्टिकोण से सुपरकॉन्टिनेंट का निर्माण कोई नई या अप्रत्याशित घटना नहीं है।
पृथ्वी एक चक्रीय प्रणाली, जिसे 'विल्सन चक्र' (Wilson Cycle) कहा जाता है, का पालन करती है; जहां हर 40 से 60 करोड़ साल में महाद्वीप जुड़ते हैं और फिर टूट जाते हैं।
लगभग 30 करोड़ साल पहले भी 'पैंजिया' (Pangea) नामक एक सुपरकॉन्टिनेंट पृथ्वी पर मौजूद था।
यह नया शोध इस स्थापित भूगर्भीय चक्र को सीधे तौर पर स्तनधारी जीव विज्ञान के साथ जोड़कर यह स्पष्ट करता है कि प्लेट टेक्टोनिक्स कैसे प्रजातियों के विकास और विलुप्ति को निर्देशित करते हैं।
अन्य प्रजातियों का भविष्य: स्तनधारियों के बाद नया शीर्ष शिकारी कौन होगा?
स्तनधारियों के लिए इस जलवायु मॉडल के परिणाम स्पष्ट रूप से विनाशकारी हैं, लेकिन वैज्ञानिक अब अध्ययन के अगले चरण की तैयारी कर रहे हैं।
अगले सिमुलेशन यह विश्लेषण करेंगे कि यह नया गर्म और शुष्क वातावरण अन्य जैविक वर्गों को कैसे प्रभावित करेगा।
यह देखा जाएगा कि क्या पक्षी (Birds), सरीसृप (Reptiles) या कीट-पतंगे इस 50°C तापमान में आनुवंशिक अनुकूलन (Genetic adaptation) कर पाएंगे।
वैज्ञानिकों के सामने यह एक खुला और अनसुलझा प्रश्न है कि यदि पैंजिया अल्टिमा पर स्तनधारी विलुप्त हो जाते हैं, तो उस नई पृथ्वी का प्रमुख निवासी कौन होगा।


