नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'India AI Impact Summit 2026' के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने एक बहुप्रतीक्षित बयान दिया है।
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| भारत ने आखिरकार सेमीकंडक्टर की दुनिया में अपना सबसे बड़ा कदम रख दिया है! |
उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारत अपने पहले कमर्शियल सेमीकंडक्टर (Semiconductor) प्रोडक्शन के बेहद करीब पहुंच चुका है।
गुजरात में स्थापित हो रही अमेरिकी कंपनी 'माइक्रोन टेक्नोलॉजी' (Micron Technology) की ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) यूनिट फरवरी 2026 के अंत तक काम करना शुरू कर सकती है।
मध्यम अवधि में आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ेगा?
वर्तमान में भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए लगभग पूरी तरह विदेशी चिप आयात पर निर्भर है, जिसका सीधा असर गैजेट्स की अंतिम कीमत पर पड़ता है।
कार, टीवी, लैपटॉप और यहां तक कि स्मार्ट वॉच भी बिना सेमीकंडक्टर चिप के नहीं चल सकतीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में ही कमर्शियल चिप असेंबली शुरू होने से सप्लाई चेन की दिक्कतें खत्म होंगी।
इससे मध्यम से लंबी अवधि (Medium to long term) में भारतीय बाजार में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और गाड़ियों की कीमतें स्थिर या कम होने की संभावना बढ़ सकती है।
माइक्रोन पर क्यों टिकी हैं सरकार की नज़रें? क्या है 'HBM' चिप का भविष्य?
सरकार के 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) के तहत 10 प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिली है, जिनमें से माइक्रोन का प्रोजेक्ट सबसे आगे है।
आईटी सचिव के अनुसार, यह कंपनी भविष्य में 'हाई-बैंडविड्थ मेमोरी' (High-Bandwidth Memory - HBM) के निर्माण पर भी विचार कर सकती है।
HBM वह एडवांस्ड पुर्जा है जो भारी-भरकम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम्स के सर्वर्स को चलाने के लिए अनिवार्य होता है।
अगर भविष्य में भारत HBM चिप्स का उत्पादन करने में सफल रहा, तो दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के लिए भारत एक प्रमुख हार्डवेयर डेस्टिनेशन बन सकता है।
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और चिप प्रोडक्शन के 4 बड़े फैक्ट्स
- पहला प्लांट: मंजूर किए गए 10 प्रोजेक्ट्स में से माइक्रोन का पहला ATMP प्लांट फरवरी 2026 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है।
- बजट का जोर: हाल ही के केंद्रीय बजट में 'सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' का ऐलान किया गया है, जो इस सेक्टर को निरंतर वित्तीय समर्थन की गारंटी देता है।
- विदेशी निवेश: इस एआई समिट में फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों ने भी भारत के टेक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की प्रबल इच्छा जताई है।
- स्वदेशी AI इकोसिस्टम: इस नए चरण का मुख्य लक्ष्य केवल विदेशी कंपनियों की असेंबलिंग से आगे बढ़कर भारत में ही 'AI-स्पेसिफिक' चिप्स की डिजाइनिंग शुरू करना है।

