2025 में महासागरों ने तोड़े गर्मी के सारे रिकॉर्ड: वैज्ञानिकों ने दी 'गंभीर परिणामों' की चेतावनी
2025 बना महासागरों के लिए अब तक का सबसे गर्म साल! वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्रों ने 23 Zettajoules रिकॉर्ड गर्मी सोखी है। जानें इसका आपके मौसम और ...
क्या हम एक 'नई और खौफनाक' दुनिया का निर्माण कर रहे हैं?
कल्पना कीजिए, 2023 में पूरी दुनिया ने जितनी बिजली का इस्तेमाल किया था, उससे 200 गुना ज्यादा ऊर्जा महासागरों ने सिर्फ एक साल में सोख ली। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (CAS), NOAA और दुनिया भर के 31 संस्थानों के 50 से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन ने पुष्टि की है कि ग्लोबल वार्मिंग का असली चेहरा महासागरों में छिपा है।
यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट थॉमस (USA) के प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक जॉन अब्राहम ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा, "ग्लोबल वार्मिंग ही ओशन वार्मिंग है। अगर आप जानना चाहते हैं कि पृथ्वी कितनी गर्म हो चुकी है या भविष्य में कितनी तेजी से गर्म होगी, तो जवाब महासागरों में है।"
तबाही का कारण: मौसम पर सीधा असर
यह रिकॉर्ड तोड़ गर्मी सिर्फ पानी के अंदर तक सीमित नहीं है। महासागरों की यह अतिरिक्त ऊर्जा तूफानों, हरिकेन और टाइफून को और अधिक शक्तिशाली बना रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया में भीषण बाढ़, मध्य पूर्व में सूखा, और मेक्सिको व उत्तरी अमेरिका में आई बाढ़ के पीछे यही बढ़ी हुई समुद्री गर्मी जिम्मेदार थी। गर्म पानी फैलता है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और तटीय इलाकों पर खतरा मंडरा रहा है।
अल नींयो और ला नीना का खेल
दिलचस्प बात यह है कि सतह के तापमान (Sea Surface Temperature - SST) के मामले में 2025, इतिहास का तीसरा सबसे गर्म साल रहा, क्योंकि प्रशांत महासागर में 'ला नीना' (ठंडा चरण) की वापसी हुई थी। लेकिन गहरे पानी में (सतह से 2000 मीटर नीचे तक) गर्मी लगातार बढ़ती रही और इसने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।
न्यूजीलैंड की ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के केविन ट्रेनबर्थ ने एक चुभता हुआ सवाल उठाया: "महासागर अब तक के सबसे गर्म स्तर पर हैं। हम एक बिल्कुल अलग ग्रह का निर्माण कर रहे हैं—क्या हम वास्तव में ऐसा करना चाहते हैं?"
वैज्ञानिकों का निष्कर्ष साफ है—जब तक हम कार्बन उत्सर्जन को शून्य (Net Zero) पर नहीं लाते, महासागर गर्मी सोखते रहेंगे और नए रिकॉर्ड टूटते रहेंगे। महासागर हमारे ग्रह का "थर्मामीटर" हैं, और अभी यह थर्मामीटर लाल निशान से ऊपर जा चुका है। अब सवाल यह नहीं है कि जलवायु परिवर्तन कब होगा, सवाल यह है कि हम इस बदलती दुनिया में खुद को कैसे बचाएंगे।

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