दिल्ली 'गैस चैंबर' में तब्दील: AQI 421 'गंभीर' श्रेणी में, GRAP-IV के कड़े प्रतिबंध लागू

दिल्ली की हवा (AQI 421) 'गंभीर' श्रेणी में। धुंध की मोटी चादर। जानें इसके मुख्य कारण (पराली, मौसम), स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव, और सरकार द्वारा लागू

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा में ज़हर का स्तर इस सीज़न के चरम पर पहुँच गया है। शनिवार सुबह (2 नवंबर 2025) वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 421 पर पहुँच गया, जो 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में आता है। शहर के ऊपर धुंध की मोटी चादर (smog) छा गई है, जिससे दृश्यता (visibility) भी काफी घट गई है।


वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के आँकड़ों के अनुसार, यह गिरावट बहुत व्यापक है और शहर के कई हिस्सों में स्थिति और भी बदतर है।

दिल्ली के कई इलाकों में स्थिति बेहद चिंताजनक

शनिवार सुबह 8 बजे तक, दिल्ली के कई प्रमुख निगरानी स्टेशन (monitoring stations) गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में थे। सबसे खराब स्थिति आनंद विहार में दर्ज की गई, जहाँ AQI 480 के खतरनाक स्तर पर पहुँच गया।

इसके ठीक पीछे मुंडका (477), बवाना (473), और जहाँगीरपुरी (470) थे, जहाँ हवा की गुणवत्ता लगभग असहनीय 'गंभीर' श्रेणी में बनी हुई है। इन आँकड़ों से पता चलता है कि प्रदूषण किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दिल्ली पर इसका असर पड़ा है।

प्रदूषण के मुख्य कारण: पराली और थमी हुई हवा

विशेषज्ञों के अनुसार, इस गंभीर स्थिति के लिए मुख्य रूप से दो कारक जिम्मेदार हैं। पहला, पड़ोसी राज्यों, विशेषकर पंजाब में, धान की पराली जलाने (stubble burning) की घटनाओं में वृद्धि हुई है। दूसरा, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियाँ, विशेष रूप से हवा की गति का बहुत कम होना, इस धुएँ को दिल्ली-NCR से बाहर नहीं निकलने दे रही हैं।

इन दोनों कारकों के मिलने से प्रदूषण के कण (pollutants) ज़मीन के पास ही जमा हो गए हैं, जिससे दिल्ली एक 'गैस चैंबर' में तब्दील हो गई है।

GRAP-IV लागू: आपातकालीन उपाय शुरू

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, CAQM ने दिल्ली-NCR क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे और अंतिम चरण को लागू कर दिया है। GRAP-IV के तहत सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं ताकि वायु गुणवत्ता में और गिरावट को रोका जा सके।

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